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( प्रभावशाली-मौलिक-निर्दोष-वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धतियाँ )

सूर्य दर्शन चिकित्सा


सूर्य दर्शन चिकित्सा

(Solar Therapy)

प्रातःकालीन उदित सूर्य दर्शन से लाभ:-

                सूर्योदय के समय लगभग एक घंटे के अंदर वायुमण्डल में अदृश्य परा बैंगनी किरणों (Ultra Violet rays) का विशेष प्रभाव होता है जो विटामीन डी का सर्वोत्तम स्रोत होती है। जिससे नेत्र ज्योति बढ़ती है तथा शरीर के सभी आवश्यक तत्त्वों का पोषण होता है। हृदय रोग, मस्तिष्क विकार, आँखों के विकार आदि अनेक व्याधियाँ दूर होती है। ये किरणें रक्त में लाल और श्वेत कणों की वृद्धि करती है। श्वेत कण बढ़ने से शरीर में रोग प्रतिकारात्मक शक्ति बढ़ने लगती है। परा बैंगनी किरणें तपेदिक, हिष्टिरिया, मधुमेह और महिलाओं के मासिक धर्म संबंधी रोगों में बहुत लाभकारी होती है।

सूर्य किरणें जीवनी शक्ति बढ़ाती है, स्नायु दुर्बलता कम करती है, पाचन और मल निष्कासन की क्रियाओं को बल देती है, पेट की जठराग्नि प्रदीप्त करती है, रक्त परिभ्रमण संतुलित रखती है, हड्डियों को मजबूत बनाती है। रक्त में कैलशियम, फासफोरस और लोहे की मात्रा बढ़ाती है, अन्तःश्रावी ग्रन्थियों के श्राव बनाने में सहयोग करती है।

मस्तिष्क को सोलेरियम बनाने में आँखों का योगदान:-

आधुनिक चिकित्सको की ऐसी मान्यता है कि उदित होते हुए सूर्य की किरणों में नेत्रों के लिए स्वास्थ्यवर्धक गुण होते हैं। आँखें ही वह माध्यम है, जिससे मस्तिष्क तक सौर ऊर्जा का प्रभाव सरलता से पहुँचाया जा सकता है। आँखें शरीर का बहुत ही नाजुक भाग होती है। अतः सूर्य दर्शन करते समय इस बात का विवेक और सावधानी आवश्यक है कि आँखों को किसी प्रकार की क्षति न हो और मस्तिष्क तक आवश्यक सौर ऊर्जा भी पहुँचायी जा सके। इसके लिए धीरे-धीरे प्रातःकालीन सूर्य दर्शन की अवधि बढ़ाकर आँखों को सूर्य दर्शन हेतु अभ्यस्त किया जा सकता है। प्रत्येक व्यक्ति प्रत्यक्ष परोक्ष रूप से कम से कम अथवा ज्यादा सौर ऊर्जा का उपयोग करता ही है। उसके बिना हमारा जीवन चल ही नहीं सकता, परन्तु सौर ऊर्जा के विधिवत् नियमित प्रयोग से ही मस्तिष्क की सुषुप्त शक्तियों को जागृत किया जा सकता है। शरीर की आवश्यकतानुसार इनका सेवन करने से हमें ऐसे चमत्कारी परिणाम मिल सकते हैं जो अनावश्यक अनियमित बिना विधि प्रायः प्राप्त नहीं होते। यदि मनुष्य अपने शरीर को सोलेरियम (सौर ऊर्जा को संग्रह करने वाला सोलर कूकर) बनाले तो मस्तिष्क की सुषुप्त शक्तियों को सरलता से जागृत किया जा सकता है।

सौर ऊर्जा के विधिवत प्रयोग से व्यक्ति के मानसिक एवं शारीरिक रोग तो जाते ही हैं, सम्यक् सोच विकसित होने से वह किसी प्रकार की गलत प्रवृत्ति नहीं करता, जिससे उसको इस जीवन में शांति, समाधि के साथ अगला जीवन भी सुखद प्राप्त होता है। आज विश्व में हजारों व्यक्ति सौर ऊर्जा के विधिवत प्रयोग द्वारा तनाव से मुक्ति तथा दुव्र्यसनों एवं दुष्प्रवृत्तियों से छुटकारा प्राप्त कर विवेक जागृत कर रहे हैं तथा सुखी जीवन जी रहे हैं।

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