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स्वस्थ रहें या रोगी?: फैसला आपका

स्वावलम्बी अहिंसक चिकित्सा

( प्रभावशाली-मौलिक-निर्दोष-वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धतियाँ )

रंग चिकित्सा


रंग चिकित्सा

(Color Therapy)

सूर्य के किरणों की भांति विभिन्न रंगों की किरणों का भी हमारे जीवन पर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है। रंग हमारे आकर्षण का मुख्य स्रोत्र होते हैं। रंगों के सही संतुलन और तालमेल से बने दृश्य हमें आनन्ददायक लगते हैं। इसी कारण वस्त्रों का चयन, भवन की दिवारों के रंगों के चयन, सजावट आदि में रंगों की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। रंगों की तरंगों के प्रकम्पनों अथवा अन्य विधियों द्वारा उनका आवश्यकतानुसार उपयोग करने से हम स्वस्थ एवं रोग मुक्त जीवन जी सकते हैं। आयुर्वेद की अनेकों दवाईयाँ शरद पूर्णिमा की चाँदनी में ही बनाई जाती है। उस दिन रात भर चाँदनी के रंग से प्रभावित अनेकों खाद्य पदार्थ आज भी स्वास्थ्य वर्धक औषधि के रूप में लिये जाते हैं। रत्न चिकित्सक अलग-अलग रत्नों से निकलने वाली अलग-अलग रंगों की तरंगों के आधार पर उन रत्नों का शरीर के विशेष स्थानों पर स्पर्श करवाकर असाध्य रोगों का उपचार करने का दावा करते हैं। ज्योतिष विशेषज्ञ भी अलग-अलग ग्रहों के दुष्प्रभावों को कम करने हेतु अलग-अलग अंगुलियों में, अलग-अलग धातुओं के साथ आवश्यकतानुसार क्षमता के रत्नों को अंगुलियों में धारण करने का परामर्श देते हैं। पुष्प चिकित्सक अलग-अलग रंगों के पुष्पों के अर्क का उपचार हेतु दवा के रूप में उपयोग करते हैं।

जीवन के लिए श्वास आवश्यक है। रंग हमारे शारीरिक, मानसिक और भावानात्मक स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। हम प्रतिक्षण श्वास के माध्यम से जिन पुद्गलों को ग्रहण करते हैं, वे वर्ण, गंध, रस, स्पर्श आदि से युक्त होते हैं। हमारे शरीर में भी प्रत्येक अवयव का अपना अपना अलग रंग होता है। इस प्रकार रंग का हमारे जीवन में बहुत महत्व होता है। बिना रंग व्यक्ति जीवित नहीं रह सकता। शरीर में किसी भी अवयव के रंग का असंतुलन रोग का कारण होता है। यदि रंगों को किसी विधि द्वारा संतुलित कर दिया जाये तो व्यक्ति स्वस्थ एवं रोग मुक्त हो सकता है। श्वास के अलावा हम प्रत्येक इन्द्रिय के विषयों के जो-जो पुद्गल ग्रहण करते हैं, उनमें भी रंग होता है। श्वास हमारे शरीर में रंगों का संतुलन पैदा करता है।

आँखों से दिखने वाले अलग-अलग प्राकृतिक दृश्यों, कपड़ों पदार्थों, चित्रों का सही तालमेल हमारे आकर्षण का एक मुख्य कारण होता है। हमें आनन्द, खुशी, प्रसन्नता प्रदान करता है। इसके विपरीत गलत रंगों का तालमेल हमें अरुचिकर लगता है। कारण यह स्पष्ट है कि रंग प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं। शरीर के प्रत्येक अंग और अवयव को अलग-अलग रंगों की विशेष आवश्यकता होती है तथा उसके असंतुलन से हम रोगी बन जाते हैं।

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