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स्वावलम्बी अहिंसक चिकित्सा

( प्रभावशाली-मौलिक-निर्दोष-वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धतियाँ )

योग चिकित्सा


योग चिकित्सा

(Yoga Therapy)

योग क्या है?

                योग सुखी जीवन जीने की सरल एवं प्रभावशाली श्रेष्ठ विधि है। जिसके द्वारा मनुष्य का शरीर पूर्ण स्वस्थ, इन्द्रियों में अपार शक्ति, मन में अपूर्व आनन्द, बुद्धि में सम्यक् ज्ञान एवं भावों में कषायों की मंदता और सजगता आती है, वही सच्चा योग होता है। योग साधना से मनुष्य जन्म-मृत्यु के बन्धनों से मुक्त हो सकता है। योग से शरीर को रोग, इन्द्रियों की थकावट और कमजोरी, मन की चिंता, भय, तनाव, आवेगों से अपने आपको मुक्त रखा जा सकता है।

                मन, वचन और काया का सम्यक् संयम, तालमेल और संतुलन ही सच्चा योग होता है। वास्तव में योग सम्यक् ज्ञान, सम्यक् दर्शन और सम्यक् आचरण की उत्कृष्ट साधना है। जिससे शरीर, मन और आत्मा ताल से ताल मिलाकर कार्य करते हैं। तीनों के विकारों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है तथा तीनों निर्विकारी बनते हैं। यही मनुष्य जीवन का ध्येय होता है।

पतंजलि योग में यम नियमों द्वारा अन्तः चेतना की सफाई के बाद आसन, प्राणायाम से शरीर बलवान होता है। वहीं प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि से मनोबल और आत्म बल बढ़ता है। जिस प्रकार फूटे हुये घड़े को छिद्र बन्द करने के पश्चात् ही पानी से भरा जा सकता है। अच्छी फसल के लिए खेती की जीव जन्तुओं से रक्षा और खाद देने के साथ-साथ, पानी से नियमित सींचन और धूप की भी आवश्यकता होती है। योग साधना ऐसी ही खेती है जिसे यम-नियम द्वारा हिंसा, झूठ, चोरी, व्यभिचार, लोभ, मलिनता, तृष्णा, आलस्य, अज्ञान अहं जैसे दस प्रकार के दुर्गुणों रूपी हानिकारक आत्मिक विकारों से रक्षा करनी होती है और आसनों का खाद तथा प्राणायाम का पानी देना होता है, तभी संतोषजनक स्वास्थ्य की उपलब्धि होती है। शरीर आकर्षक और पुष्ट बनता है। शरीर में हल्कापन, कार्य करने का उत्साह बढ़ता है। शरीर की बेटरी चार्ज हो जाती है। चिन्ता, भय, निराशा, अनिद्रा, दुर्बलता, आलस्य आदि दूर होकर व्यक्ति सजग एवं अप्रमादी बनने लगता है। अपने आपको पहचानने लगता है। आत्मावलोकन करने लगता है। यही आत्मा से परमात्मा बनने की कला होती है।

                परन्तु आजकल विश्व भर में प्रचलित एवं प्रसारित पंतजलि योगाभ्यास प्रायः आसन और प्राणायाम तक सीमित होता जा रहा है। यम, नियम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि के अभाव में नर से नारायण और आत्मा को परमात्मा बनाने वाली योग साधना मात्र शरीर का व्यायाम बन कर रह गया है। यह योग का अवमूल्यन है, अष्टांग योग की क्रमिक साधना ही सच्चा योग होता है।

पतंजलि योग और स्वास्थ्य

पतंजलि अष्टांग योग और स्वास्थ्य

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