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स्वस्थ रहें या रोगी?: फैसला आपका

स्वावलम्बी अहिंसक चिकित्सा

( प्रभावशाली-मौलिक-निर्दोष-वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धतियाँ )

क्या उपचार हेतु प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष हिंसा उचित है?


क्या उपचार हेतु प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष हिंसा उचित है?

(Is direct or indirect violence justified for treatment?)

                किसी प्राणी को दुःख दिये बिना हिंसा, क्रूरता, निर्दयता हो नहीं सकती। पशु भले ही बेजुबान हो, बेजान नहीं होते। जो प्राण हम दे नहीं सकते, उसको लेने का हमें क्या अधिकार? दुःख देने से दुःख ही मिलेगा। प्रकृति के न्याय में देर हो सकती है, अंधेर नहीं। जो हम नहीं बना सकते, उसको स्वार्थवश नष्ट करना बुद्धिमता नहीं। अतः अन्य प्रभावशाली चिकित्सा पद्धतियों का विकल्प होते हुए भी चिकित्सा के नाम पर प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से हिंसा करना, कराना और करने वालों को सहयोग देना अपराध है। जिसका परिणाम हिंसा में प्रत्यक्ष-परोक्ष सहयोग देने वालों को भविष्य में दुःखी बन भुगतना पड़ेगा। यदि किसी का आशीर्वाद हमारा भला कर सकता है तो हिंसक अवयवों से निर्मित दवाइयों के माध्यम से शरीर में जाने वाले उन बेजुबान प्राणियों की बद्-दुआओं की तरंगे, हिंसा में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वालों के शरीर को दुष्प्रभावों से ग्रसित करे तो आश्चर्य नहीं। आधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान की जानकारी हेतु करोड़ों जानवरों का प्रतिदिन विच्छेदन किया जाता है। दवाइयों के निर्माण और उनके परीक्षण हेतु जीव-जन्तुओं को निर्दयता, क्रूरतापूर्वक यातना दी जाती है। किसी को दुःख देकर सुख और शांति कैसे मिल सकती है?  यह तो पशुता एवं अनैतिकता का लक्षण है। जैसा करेंगे वैसा फल मिलेगा, यह कर्म का सनातन सिद्धान्त है। चिकित्सा के नाम पर प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से हिंसा करना, कराना और करने वालों को सहयोग देना अपराध है। अतः चिकित्सा हेतु प्रत्यक्ष या परोक्ष हिंसा, कर्जा चुकाने हेतु ऊँचे ब्याज पर कर्जा लेने के समान नासमझी होती है।

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