क्यों पढ़े आरोग्य आपका   ?

स्वस्थ रहें या रोगी?: फैसला आपका

स्वावलम्बी अहिंसक चिकित्सा

( प्रभावशाली-मौलिक-निर्दोष-वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धतियाँ )

क्या हम स्वस्थ रहना चाहते हैं?


क्या हम स्वस्थ रहना चाहते हैं?

(Do we want to be healthy?)

आज हमारे स्वास्थ्य पर चारों तरफ से आक्रमण हो रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय की नीतियों में रोग के मूल कारण गौण हैं। भ्रामक विज्ञापनों तथा स्वास्थ्य के लिये हानिकारक प्रदूषण, पर्यावरण, दुव्र्यसनों एवं दुष्प्रवृत्तियों पर कानूनी प्रतिबन्ध नहीं हैं। उल्टी वे सरकारी संरक्षण में पनप रही हैं। आज राष्ट्रीयता, नैतिकता, स्वास्थ्य के प्रति सजगता थोथे नारों और अन्धाःनुकरण तक सीमित हो रही है। परिणामस्वरूप जो नहीं खिलाना चाहिये वह भी खिलाया जा रहा है। जो नहीं पिलाना चाहिये उसे भी सरकार पैसे के लोभ में पिला रही हैं। जो काम-वासना, क्रूरता, हिंसा आदि के दृश्यों को सार्वजनिक रूप से नहीं दिखाया जाना चाहिये, मनोरंजन के नाम से उसे भी दिखाया जा रहा है। जो नहीं पढ़ाना चाहिये वह भी पढ़ाया जा रहा है और जो अकरणीय समाज एवं राष्ट्र के लिये घातक, हिंसक गतिविधियाँ हैं, वे प्रोत्साहित की जा रही हैं। आज रक्षक ही भक्षक हो रहे हैं। खाने में मिलावट आम बात हो गई हैं। सारा वातावरण पाश्विक वृत्तियों से दूशित हो रहा है। सरकारी तन्त्र को सच्चाई जानने, समझने एवं उसकी क्रियान्विति में कोई रुचि नहीं है। सारे सोच का आधार है भीड़, संख्या बल। क्योंकि जनतन्त्र में उसी के आधार पर  नेताओं का चुनाव और नीतियाँ निर्धारित होती हैं। फलतः उनके माध्यम से राष्ट्रीय विरोधी, जनसाधारण के लिये अनुपयोगी, स्वास्थ्य को बिगाड़ने वाली कोई भी गतिविधी स्वार्थवश आराम से चलायी जा सकती है।

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