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स्वावलम्बी अहिंसक चिकित्सा

( प्रभावशाली-मौलिक-निर्दोष-वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धतियाँ )

स्वावलम्बी चिकित्सा पद्धतियाँ क्यों अधिक प्रभावशाली


स्वावलम्बी चिकित्सा पद्धतियाँ क्यों अधिक प्रभावशाली

(Why self-reliant therapies are more effective)

चिकित्सा पद्धतियों को मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया जा सकता है। प्रथम तो बिना दवा वाली स्वावलंबी चिकित्सा पद्धतियाँ तथा दूसरी दवाओं के माध्यम से उपचार करने वाली परावलंबी चिकित्सा पद्धतियाँ। स्वावलंबी चिकित्सा पद्धतियों में स्वयं का उपचार स्वयं द्वारा किया जाता है, उसमें उपचार हेतु दवा अथवा चिकित्सकों पर पूर्णतया निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होती ।

 ऐसी स्वावलंबी चिकित्सा पद्धतियों में बिना किसी जीव को प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष कष्ट पहुँचाए पूर्णतः अहिंसक एवं दुष्प्रभावों से रहित सहजता से उपलब्ध साधनों का सहयोग लिया जाता है। इसमें शरीर, मन और आत्मा में जो जितना महत्वपूर्ण होता है, उसको उसकी क्षमता के अनुरूप महत्व एवं प्राथमिकता दी जाती है। प्रकृति के सनातन सिद्धान्तों की उपेक्षा न हो, इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है। शरीर विज्ञान के विशेष जानकारी की आवश्यकता नहीं होती है। ये उपचार सहज, सरल, सस्ते, सर्वत्र उपलब्ध होने से व्यक्तिको सजग, स्वतंत्र, स्वावलंबी एवं सम्यक् सोच वाला बनाते हैं। ये चिकित्सा पद्धतियाँ हिंसा पर नहीं अहिंसा पर, विषमता पर नहीं समता पर, साधनों पर नहीं साधना पर, दूसरों पर नहीं स्वयं पर, क्षणिक राहत पर नहीं , अपितु अंतिम प्रभावशाली स्थायी परिणामों पर आधारित होती हैं। रोग के लक्षणों की अपेक्षा रोग के मूल कारणों को नष्ट करती है, जो शरीर के साथ साथ मन एवं आत्मा के विकारों को दूर करने में सक्षम होती है। ये पद्धतियाँ प्रकृति के सनातन सिद्धान्तों पर आधारित होने के कारण अधिक प्रभावशाली, वैज्ञानिक, मौलिक एवं निर्दोष होती हैं।

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